टहरौली (झाँसी) उमाकांत गुप्ता सोनू/ देवेेेश कुमार गुप्ता :-सरकार के लाखों प्रयासों के बावजूद भी झाँसी जिले के टहरौली में स्वास्थ्य सेवाओं का दम निकल रहा है । प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टहरौली में अक्सर यहाँ पदस्थ प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेश चन्द्र अक्सर नदारद रहते हैं। इस वजह से क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में भटकना पड़ता है ।
टहरौली में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने पुराने ढर्रे पर चल रहा है । एक तो अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं, ऊपर से यहां पदस्थ प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेश चन्द्र भी अपनी मनमानी पर उतारू है । अक्सर डॉक्टर अपने केबिन से नदारद रहते हैं । बीते दिन भी डॉक्टर महेश चन्द्र ओपीडी से नदारद पाये गये । बताया यह जा रहा है कि डॉक्टर अपने केबिन में कभी समय से नहीं पहुंचते हैं । उनके द्वारा केवल खानापूर्ति की जाती है । जब चाहे, उस समय अस्पताल पहुंचते हैं और जब मर्जी, तब चले जाते हैं । डॉ. महेश चन्द्र अधिकांश समय अपने निजी अस्पताल में ही बैठते हैं । जब भी कोई मरीज टहरौली के स्वास्थ्य केन्द्र पर जाता है तो उसको डॉ. महेश चन्द्र के निजी अस्पताल में ही भेज दिया जाता है । प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा सरकारी अस्पताल के ठीक सामने ही अपना निजी अस्पताल बनवाया गया है । सूत्रों द्वारा बताया गया है कि इस निजी अस्पताल में किसी अन्य डॉक्टर की डिग्री लगायी गयी है जबकि यहाँ डॉ. महेश चन्द्र ही मरीजों का ईलाज करते हैं । प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र टहरौली में पदस्थ प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के द्वारा अपने निजी अस्पताल के साथ साथ ही अपना निजी मेडिकल स्टोर भी बनवाया गया है जहाँ दवाईयों के नाम पर मरीजों से मोटा दाम वसूला जाता है । सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों द्वारा जब डॉक्टर साहब के निजी अस्पताल में आने से मना किया जाता है या उनको सरकारी अस्पताल में आकर इलाज करने के लिये कहा जाता है तो डॉक्टर साहब मारपीट और गाली गलौच पर आमादा हो जाते हैं । इसका एक वीडियो पिछले कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर वायरल भी हो चुका है । इस सबके चलते मरीजों को सरकारी अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं ।
सरकारी डॉक्टर द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की दवाइयों को अपने निजी अस्पताल में आने वाले मरीजों को लिखा जाता है । सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर हर वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार को लाखों का चूना लगा रहे हैं । सरकार द्वारा डॉक्टरों को निजी चिकित्सकीय भत्ता (पी.पी.ए.) भी दिया जाता है इसके बावजूद भी डॉक्टर अपने निजी अस्पतालों में इलाज करने से बाज नहीं आ रहे हैं । टहरौली स्वास्थ्य केन्द्र पर घंटों मरीज डॉक्टर के इंतजार में खड़े रहते हैं, लेकिन जब खड़े होने की हिम्मत नहीं होती, तो मायूस होकर सरकारी अस्पताल से वापस लौट जाते हैं । और निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवाने के लिये विवश हो जाते हैं । क्षेत्र के लोगों द्वारा इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से की गयी लेकिन कोई कार्यवाही न होने से केवल मायूसी ही हाथ लगी । जिले के स्वास्थ्य विभाग में डॉ. महेश चन्द्र की मजूबत पकड़ बतायी जाती है जिसके कारण इनके ऊपर जाँच की आँच आज तक नहीं पहुँच सकी है । सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर वर्षों से यहीं जमे हुये हैं । इन सबके चलते प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ डॉक्टर की कार्यशैली में आजतक कोई सुधार नहीं हुआ है । क्षेत्रवासियों ने डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है ।
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